Happy Holi…

Even though we are not with you on this joyous occasion of Holi, our thoughts and prayers are with you. We wish you a joyous Holi.

Today is Holika Dahan – to destroy the evils inside you.

Tomorrow is Grand Holi festival – to spread love between peoples through colors.


Holi is a great time to break the ice, rekindle relationships, and bond with those you care about through the use of color.
Holi moments should be celebrated together so that memories can be enjoyed later.

Play safe Holi, Eco-friendly Holi…along with the bliss of the supreme personality Smt. Radha Rani and Krishna.

To know more, kindly visit : The Divine Holi with RadhaKrishna

New Year 2022 : Best Wishes!

।।। राधे राधे ।।।

हर वर्ष की भाँति बीत गया 2021 भी, पर इस वर्ष काल ने अपने पन्नों पर कोरोना और उससे उत्पन्न हुई महंगाई की कहानी लिख दी ! संसार में कोई भी घटना अकारण नहीं होती…..किंतु वक़्त कहाँ है कारण पर चिंतन करने का…. ?

कहने को तो साल में 365 दिन होते हैं, किंतु पहले तो हम अपनी -अपनी सांसारिक बुद्धि के अनुसार अपना-अपना मनचाहा मकड़जाल तैयार करते है, फिर उसी में उलझते-सुलझते एक-एक दिन गवाँ देते हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो यह है कि मृत्यु जो घात लगाए हमारी प्रतीक्षा कर रही है उसे नकारकर चलते हैं जबकि मृत्यु से ही हमारे जीवन की क़ीमत है। शरीर सांसारिक कर्तव्यों को समर्पित, मन माया की टहल में लगा हुआ, किंतु आत्मा अशांत, अतृप्त जबकि उसकी यात्रा शांतिपथ की है; आनंद के पथ की है! किंतु कैसे मिलेगा उसे आनंद? कैसे सफल होगा यह जीवन? इस गूढ़ प्रश्न का जवाब बिल्कुल सीधा है…। वह सीधा जवाब यह है कि जिस अदृश्य ने हमें उपहार में यह बेशक़ीमती जीवन दिया है उसका पल-पल शुक्रिया अदा करके हमें विनम्रता अर्जित करनी है; हल्का होना है।

वह कैसे? इसका जवाब देने के लिए भगवान संत को भेजते हैं जो हमें यह बताते हैं कि इसके लिए हमें भगवान की भक्ति करनी होगी विश्व के पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जी भक्ति का अर्थ सेवा बताते हैं।

श्री कृष्ण भगवान ने गीता में कहा है कि जीव जितनी मात्रा में अपने-आप को मुझे समर्पित करता है मैं भी उतनी ही मात्रा में उसे भजता हूँ अर्थात् प्रेम करता हूँ। इसलिए भक्तों ने यह कहा है हमें वही करना है जिससे उन्हें प्रसन्नता हो। वास्तव में इस दुर्लभ जीवन का प्रत्येक दिन उनकी सेवा अर्थात् भक्ति करने के लिए मिला है। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर स्वामी श्री कृपालु जी महाराज ने नव वर्ष के प्रथम दिवस को भक्ति दिवस कहा है।

अत: नव वर्ष के इस महत्त्वपूर्ण दिन पर हम भगवान की निरंतर सेवा करने का संकल्प लेकर भक्ति दिवस नाम को सार्थक करें और अपने हरि-गुरु को प्रसन्न करने का परम सौभाग्य पा सकें ! यह भी एक अन्य विचार आता है मन में कि हम जो नए साल का जश्न मानते हैं, बधाइयाँ बांटते हैं – क्या वह सही है ? मेरे मत से तो बधाइयाँ तब बाटी जाती हैं जब हमें कोई उपलब्धि हो ! तो इस नव वर्ष पर यह भी विचार होना चाहिए कि हमारी उपलब्धि क्या रही है? क्या कमाया हमने ऐसा जिसे उपलब्धि कहा जाये ? जैसे व्यापारी साल के अंत में आय और व्यय का हिसाब लगाते हैं एवं नए वर्ष में नयी योजना बनाते हैं, वैसे ही हमें भी अपनी आध्यात्मिक कमाई का विश्लेषण करना चाहिए !

अगर वास्तव में कोई विशेष उपलब्धि हुई है तो वह एक ही हो सकता है – हमें हरि – गुरु से कितना प्यार हुआ है। यदि ये आत्मविश्लेषण किया जाये तो हम पाएंगे की बधाई देने जैसी कोई बात नहीं है , बात है नव वर्ष आ गया है – अब सचेत होने की ! यह सोचने की जरूरत है कि जो हुआ सो हुआ, अब समय आ गया है मोह निद्रा से जागने का , विचार करने का और अपने जीवन को मृत्यु से अमरता की और ले कर जाने के लिए सच्चा प्रयत्न करने का !

और रही बात सांसारिक जगत की, तो यहां के सारे कार्य अपने कर्मानुसार चलित होते ही रहते हैं और होते रहेंगे। अपने इष्ट का स्मरण करते हुए, सभी सांसारिक कार्य करते रहिए और सदैव इस जगत की प्रत्येक वस्तु से अनासक्त रहते हुए जीवन बिताइए, तो आपका इस तरह जीना भी भक्ति बन जाएगा, और कुछ ही समय पश्चात अंतःकरण शुद्ध होते ही, आपको आपकी अभीष्ट मंजिल भी मिल जाएगी।

अतः कल आने वाले इस शुभ नव वर्ष की हमारी टीम की तरफ से आप सबको नव वर्ष की राधे राधे और ढेर सारी शुभकामनाएं।