Reflection Of Our Social Values

मनुष्य प्रकृति की एक अदभुत रचना है । सम्पूर्ण प्राणी जगत में मात्र यही एक प्राणी है, जिसने अपने जीवन को व्यतीत करने के लिए कुछ सामाजिक मूल्यों का निर्धारण किया है । सामाजिक मूल्य हमारे जीवन का आदर्श होते हैं ।
आधुनिक सामाजिक युग में परिवर्तित होते परिवेश के अंतर्गत सामाजिक मूल्यों में भी परिवर्तन होने लगे हैं । इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि किसी भी क्षेत्र में होने वाले बदलाव मनुष्य के जीवन के लगभग प्रत्येक पक्ष को स्पर्श करते हैं । ऐसे ही कुछ पहलुओं को इस आर्टिकल के माध्यम से दर्शाया गया है !

 

हमारे यहां…बदलते सामाजिक परिवेश

जाड़े की ही रात थी जब उसने ख्वाब देखा था । खुली आँखों से । हाँ, ख्वाब ही था वो । कभी मुक्कमल न होने वाला ख्वाब । कि उसके हाथों में एक गोल्डन रिंग है और महफ़िल में सब उसके सुखी जीवन की कामना कर रहे हैं । कि उसके बगल में बैठा शख्स उसका अप्रतिम प्रेमी है जिसे वो वर्षों से चाहती आयी थी । कि उसके हाथों में मेहँदी रची है । चटक लाल । और उसके दोनों हाथों में उकेरे हुए हैं चित्र । दूल्हा और दुल्हन के । दाहिने हाथ में तो उसका खुद का ही नाम लिखा हुआ था । पर बाएँ हाथ में बड़ी ही चतुराई से लिखा हुआ था उसका नाम जिसे वो खुद ढूँढने की कोशिश कर रही थी । एक नाम तो था पर ये वो नाम नहीं था जो उसके मुताबिक होना चाहिए था । 

क्योंकि हमारे यहाँ रिश्ते दिल से कम और जन्मपत्री से ज्यादा बनते हैं ।

‘वर और वधू अपने स्थान पर खड़े हो जाएँ ।’ विवाह संस्कार संपन्न करवाने आये पंडित जी की आवाज़ से उसका स्वप्न छिन्न भिन्न हो गया । उसको साफ़ नज़र आ रहा था बाएँ हाथ पर लिखा वो नाम जो कुछ ही देर बाद उसका जीवनसाथी, उसका पति कहा जाएगा । और वो जिसकी अर्द्धांगिनी बन जायेगी ।
क्योंकि हमारे यहाँ सात फेरे ही सबकुछ हैं ।


सुबह-सुबह रस्मों के बीच दूल्हा बिना एक तोले की सोने की जंजीर के निवाला लेने से इंकार कर गया । मान मनौवल किया गया । आखिरकार एक तोले की सोने की जंजीर की जगह 25 हजार रुपए नगद दिए जाने पर दूल्हे ने एक कौर खिचड़ी खायी ।
क्योंकि रूठने का बहाना करके लड़की के बाप को लूटना भी हमारी परम्परा है ।…continue reading

#Reblogged Article

#Gul-E-Shazar

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9 thoughts on “Reflection Of Our Social Values

  1. nice thought
    due to the dowry system a daughter becomes a burden on her father & what is the cosequence- many are killed in the wombs before opening their little eyes in this world.

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