Raksha Bandhan – ‘Rakhi’ Special

Raksha Bandhan is a festival observed to pay homage to the sacred and unconditional bond between brothers and sisters. Raksha Bandhan in Sanskrit literally means “the tie or knot of protection”. It’s an ancient Vedic festival which is celebrated every year in the month of Shravan (August). This year Raksha Bandhan will be celebrated on August 7, 2017.

On this festival, as a ritual, a sister ties a colourful rakhi, a sacred thread that symbolizes love between siblings, around her brother’s wrist. The festival starts by performing traditional Aarti and concludes with prayers for the well being (good health, prosperity and happiness).
भाई-बहन का अनूठा रिश्ता है ये जिसमें, अनुज हो या अग्रज…बड़ा हो या छोटा हर भाई-बहन इस अद्वितीय, अटूट, अहम रिश्ते में प्यार से बंधा है !

There’s no other love like the love for a brother. There’s no other love like the love from a brother.

Procedure – How a sister tied a bond on brother’s wrist ?

Normally the sister prepares a special plate with a lighted lamp. The plate has the customary items like haldi (turmeric powder), kumkum, some betel nuts and coloured rice (called Akshata). 

Arti is done by rotating the plate with lighted lamp in a clockwise direction three times in front of the person. Then the akshata is showered on the brother’s head & a Kumkum Tilak is applied.

Then a Rakhi is tied on brother’s wrist and sweets offered to brothers. Then the brother touches the feet of sister to take her blessing. After that, the brother vows to guide and protect her throughout the life under all circumstances. Moreover, as a part of tradition, a brother presents his sister varied exciting gifts. Gifts play a prominent role and symbolizes tokens of love and affection.

Reason For Celebration : Puranik Significance Of Raksha Bandhan

Reason behind its celebration have some divine stories which are describing here in short…

1. King Bali and Vaman Incarnation Of God –

पुराणों के अनुसार रक्षा बंधन, लक्ष्मी जी का बली को राखी बांधने से जुडा हुआ है. एक बार की बात है, कि दानवों के राजा बलि ने सौ यज्ञ पूरे करने के बाद चाहा कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो, राजा बलि कि इस मनोइच्छा का भान देव इन्द्र को होने पर, देव इन्द्र का सिहांसन डोलने लगा.

घबरा कर इन्द्र भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु वामन अवतार ले और ब्राह्मण वेश धर कर, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने जायें. ब्राह्मण बने श्री विष्णु ने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली. राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे दी.

वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृ्थ्वी को नाप लिया. अभी तीसरा पैर रखना शेष था. बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया. ऎसे मे राजा बलि अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता है. आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा, “तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए”. वामन भगवान ने ठीक वैसा ही किया, श्री विष्णु के पैर रखते ही, राजा बलि परलोक पहुंच गया. 

बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न हुए, उन्होंने आग्रह किया कि राजा बलि उनसे कुछ मांग लें. इसके बदले में बलि ने रात दिन भगवान को अपने सामने रहने का वचन मांग लिया. श्री विष्णु को अपना वचन का पालन करते हुए, राजा बलि का द्वारपाल बनना पडा. इस समस्या के समाधान के लिये लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया. लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे राखी बांध अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आई. इस दिन का यह प्रसंग है, उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी. उस दिन से ही रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाने लगा.

2. Goddess Santoshi and Shri Ganesh – 

माता संतोषी के अवतार की कथा में प्रसंग है कि एक समय राखी के त्योहार पर भगवान गणेश की बहिन ने भगवान गणेश को राखी बाँधी. परंतु भगवान गणेश के दोनों पुत्रों शुभ और लाभ को कोई राखी बाँधने वाला नहीं था क्योंकि उनकी कोई बहिन नहीं थी. इस बात से शुभ और लाभ बहुत मायूस हुए. तब दोनों ने भगवान गणेश और माता रिद्धि व सिद्धि से एक बहिन के लिए बहुत प्रार्थना की. भगवान गणेश ने दोनों पुत्रों शुभ और लाभ की प्रार्थना स्वीकार की और तब माता रिद्धि-सिद्धि द्वारा दैवीय ज्योति से संतोषी माता का अवतार हुआ. तब संतोषी माता ने शुभ और लाभ को राखी बाँधी और तभी यहाँ ये धारणा ली गयी.

3. Shri Krishna and Draupadi –

महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा श्री कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बांधने के वृत्तांत मिलते हैं। महाभारत में ही रक्षाबंधन से संबंधित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। श्रीकृष्ण ने बाद में द्रौपदी के चीर-हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था। तभी इस रक्षा सूत्र से बँधे होने के कारण यह त्योहार मनाया जाने लगा !

The concept of Raksha Bandhan was also used by Rabindranath Tagore during British times to keep Hindus and Muslims united. 

Raksha Bandhan In Today’s Society  – Views on Indian Culture 

  • भारत के कई क्षेत्रों में इसे अलग – अलग नामों से अलग – अलग रुप में मनाया जाता है. जैसे उतरांचल में इसे श्रावणी नाम से मनाया जाता है. भारत के ब्राह्मण वर्ग में इस दिन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है. इस दिन ब्राह्मण वर्ग अपने यजमानों को यज्ञोपवीत तथा राखी देकर दक्षिणा लेते है. अमरनाथ की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा भी रक्षा बंधन के दिन समाप्त होती है! 
  • भारत के राजस्थान राज्य में इस दिन रामराखी और चूडा राखी बांधने की परम्परा है. राम राखी केवल भगवान को ही बांधी जाती है व चूडा राखी केवल भाभियों की चूडियों में ही बांधी जाती है. यह रेशमी डोरे से बनी राखी होती है. यहां राखी बांधने से पहले राखी को कच्चे दूध से अभिमंत्रित किया जाता है. और राखी बांधने के बाद भोजन किया जाता है !

  • भारत में स्थान बदलने के साथ ही पर्व को मनाने की परम्परा भी बदल जाती है, यही कारण है कि तमिलनाडू, केरल और उडीसा के दक्षिण में इसे अवनि अवितम के रुप में मनाया जाता है. इस पर्व का एक अन्य नाम भी है, इसे हरियाली तीज के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन से पहले तक ठाकुर झुले में दर्शन देते है, परन्तु रक्षा बंधन के दिन से ये दर्शन समाप्त होते है !

SERVICES PROVIDED BY INDIAN GOVERNMENT : 

भारत सरकार के डाक-तार विभाग द्वारा इस अवसर पर दस या बीस रुपए वाले आकर्षक लिफाफों की बिक्री की जाती हैं। इसमें राखी के त्योहार पर बहनें, भाई को मात्र पाँच रुपये में एक साथ तीन-चार राखियाँ तक भेज सकती हैं। डाक विभाग की ओर से बहनों को दिये इस तोहफे के तहत  50 ग्राम वजन तक राखी का लिफाफा एकदम कम कीमत में भेजा जा सकता है जबकि सामान्य 20 ग्राम के लिफाफे में एक ही राखी भेजी जा सकती है। यह सुविधा रक्षाबन्धन तक ही उपलब्ध रहती है।

 कुछ बड़े शहरों के बड़े डाकघरों में राखी के लिये अलग से बाक्स भी लगाये जाते हैं। इसके साथ ही चुनिन्दा डाकघरों में सम्पर्क करने वाले लोगों को राखी बेचने की भी इजाजत दी जाती है, ताकि लोग वहीं से राखी खरीद कर निर्धारित स्थान को भेज सकें। लेकिन आजकल तो  formality करने के लिये युवा वर्ग सोशल मीडिया का खूब प्रयोग कर रहे हैं !

Raksha Bandhan, the festival marking the brother-sister bond, also celebrated with traditional fervour and gaiety with current Indian Prime Minister Narendra Modi , President and some other leaders also participating in it. 

 This loving affection bond is not with just biological brothers and sisters but also with anyone who feels a brotherly or sisterly bond of love. This symbolize bond with peace and love is a mascot for the relationship between brothers and sisters. That is why boys are often found missing from colleges and workplaces during Raksha Bandhan!

Ritual Timings : (August 7, 2017)

Since the Bhadra Timing ends at 11:04 AM, so Ceremony Timing will be in between 11:05 AM to 01:25 PM. 

 After 01:25 PM, Sootak timing begins which is not a good time for bonding. Hence described time is good enough.

A MESSAGE FOR TEXTING PURPOSE :

A meaningful message that you can text, write or say to your brother or sister – or to anyone whom you consider to be like a brother or sister.

For sisters – Dear sister, you have always supported me since childhood. You have always guided and shown me the right way. I’m glad to have you by my side always. Every day I feel blessed that you are my sister. You bring fun, joy, and fulfillment into my life. Sister, you are the sweetest of all the person I know in my life. You make my life worth a smile. The bond between us is so special. Can’t wait to celebrate the Rakhi rituals with you!

Thank you for being there for me always when I needed you the most. You are the best. I miss you. Happy Raksha Bandhan !

For brothers –It is true what they say: a brother is the best friend of them all. Having a noble brother like you in my life adds so much value into my life. You always make me feel safe in this crazy world no matter the distance between us. I wish you prosperity, well-being, success and happines in your life bro during this Rakhi festival. Whenever life seems a bit difficult, I look around and think about you and whenever I do that, i smile no matter how big the challenge may seem. Since, I know I have you bro as my security.

Thank you for being such a great brother. Happy Raksha Bandhan !

 

Atlast, Coming to the conclusion… Raksha Bandhan is a special day to all since it is meant to bring togetherness and love between sisters and brothers.

It strengthens the family bond and brings oneness in the family. It strengthens the bond that exists between either biologically related brothers and sisters, handicapped bro and sis or any given brother-sister type of co-existence. Once the Rakhi is tied on the brother’s wrist, there is exchange of hugs and gifts between them. This brings not only them but the whole family together as one.

Celebrate Safe Raksha Bandhan ! Best Wishes from our team !! Like Share and comment. Thank You !!!


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