Chitrakoot Dham – A Visit to Divine Place

                    | श्री गणेशाय नम : |

CHITRAKOOT – Welcome ! Today we come back with a great article. You all should definately read and visit too. Its a place of divine and natural beauty. Chitrakoot Dham which comes under both the states of India i.e. Uttar Pradesh (U.P.) and Madhya Pradesh (M.P.). It fabled as the ‘Hill of many wonders’. This place is covered with mountains and rivers. This sanctified ground is actually the ‘Abode Of Lord Rama’. Lord Rama and Sita spent around eleven and half year of their fourteen years of exile. The rest years spent in killing the demon king ‘Ravan’ and his territories.

 ‘Chitra’ means beautiful as a painting and ‘Koot’ means mountain. Chitrakoot is a peaceful pilgrimage place and considered as the abode of Gods.  It was here that the great sages Atri Muni, Rishi Agastya and Sage Sharbhanga choose to meditate and gained extraordinary divine powers. 

It astounding with innumerable temples dedicated to Ancient Hindu Gods that hold very important mythological connections. Chitrakoot has many places of interest in and around. We will discuss each with short details. So lets start…

Note : Those who can’t visit this divine place, they don’t need to worry. We’ve provided the relevant images sothat you could see of the lord’s idol here and feel blessed. Thats what we called ‘Mansik Yatra’.

Places of Interest in and Around ‘Chitrakoot’ :

IMPORTANT NOTE : 

Before starting, we would like to mention here that the place has plenty of monkeys who follow you and can snatch away belongings in a fraction of seconds. So you need to be very careful. If you wish to feed them something, then please carry enough food as they are going to be everywhere. If you forgot to carry foods, you need not worry. There are the sell of their feedable food like Grams, dry fruits etc in small packets.

1. कामतानाथ मंदिर (Kaamata Nath Temple)- 

चित्रकूट का सबसे महत्वपूर्ण स्थान श्री कामदगिरी है इसको भगवान का ही स्वरूप माना जाता है। इसमें प्रवेश के चार द्वार हैं, जिसमें श्रीकामदगिरी का उत्तरी द्वार मुख्यद्वार के नाम से जाना जाता है। श्री रामघाट से स्नान करके लोग श्री कामदगिरी के मुख्य दरवाजे पर आते तथा यहीं से परिक्रमा आरम्भ करते हैं। 

कामदगिरी एक विशाल पर्वत है और इनके सम्बन्ध में यह कहा जाता है कि पर्वत कई तरह की धातुओं, मणियों से अलंकृत है। प्रमाणत : –
सुवर्ण कूटं रजताभिकूटं, माणिकयकूटं मणिरत्नकूट्म। 

अनके कूटं बहुवर्ण कूटं, श्री चित्रकूटं शरणं प्रपद्य।।

इस पर्वत में रघुकूल भूषण श्रीराम ने अपने वनवास के काल में जीवन के साढे ग्यारह वर्ष व्यतीत किये। उनके रहने से यह पर्वत हर ऋतु में प्रत्येक प्रकार के फलों, पुष्पों आदि से भरा रहता था !

Kamad Giri – a sacred hill that is considered to be the heart of Chitrakoot. This Sanskrit word means the mountain which fulfills all the wishes and desires. The chiming of bells, the fragrance of incense, the echoes of ‘Jai Sri Ram’, and chanting of Vedic hymns makes this place saturated in spirituality.

त्रेता युग में जब दशरथ पुत्र भगवान श्रीराम, माँ सीता व भ्राता लक्ष्मण सहित 14 वर्ष के वनवास के लिए निकले तो वाल्मीकि ऋषि से पूंछने लगे कि साधना के लिए उत्तम स्थान कौन सा है और हमे कहां निवास करना चाहिए ? तो वाल्मीकि ऋषि ने पहले तो भक्त वत्सलतावश कहा कि प्रभु पहले वो स्थान बताइए जहाँ आप नही हैं ? फिर अंत मे बताया कि आप तीनों चित्रकूट गिरी जाएं, वहां आपका सर्व प्रकार से कल्याण होगा | ऋषि वाल्मीकि की आज्ञा पाकर तीनों चित्रकूट पहुंच गए और चित्रकूट के कामदगिरी पर्वत पर निवास करने लगे ! 

चित्रकूट गिरी करहु निवासू। जहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।।

कामदगिरी पर्वत को चित्रकूट गिरी भी कहते है |ये चित्रकूट पर्वत वही पावन स्थल है जहां भगवान राम ने अपने वनवास के 14 वर्ष में से करीब 11.5 वर्ष बीताए थे !जब श्री राम चित्रकूट पर्वत पर निवास करते थे तो इसी पावन स्थल पर प्रभु राम का दरबार लगता था और श्रीराम भक्तों का कल्याण करते थे |जब दशरथनंदन श्रीराम का वनवास काल समाप्त हुआ और श्रीराम चित्रकू़ट छोड़कर जाने लगे तो चित्रकूट गिरी ने भगवान राम से रोते हुए सविनयपूर्वक निवेदन किया कि –

 हे प्रभु !आपने इतने दिनों तक यहां वास किया जिससे ये जगह पावन हो गई लेकिन आपके जाने के बाद मुझे कौन पूछेगा और कौन वास करेगा यहाँ ? तब श्री राम ने आशीष दिया कि अब आप कामद हो जाएंगे यानि ईच्छाओं की पूर्ति करने वाले हो जाएंगे, जो आपकी शरण में सच्चे मन से आएगा, उसकी सारी मनोकामना पूरी होंगी और उस पर सदैव मेरी कृपा बनी रहेगी ! 

तो इस प्रकार चित्रकूट में प्रभु श्रीराम ने कामदगिरी पर्वत को अपनी कृपा का पात्र बनाया और कामदगिरी पर्वत बन गया भगवान कामतानाथ । तुलसीदास जी ने भी कहा है कि श्री राम की ही कृपा से यह मनुष्यों की सम्पूर्ण कामनाओं का पूर्ण करने वाला है –

कामद्गिरी भये राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत विषादा।।

2. राम घाट (Ram Ghat) – 

राम घाट वह घाट है जहाँ प्रभु राम नित्य स्नान किया करते थे | मंदाकिनी नदी के पश्चिम तट पर बने हुए घाटों के मध्य में स्थित घाट को रामघाट कहते हैं। इसका यह नाम पूज्यपाद गोस्वामी जी द्वारा भगवान राम के मस्तक में चन्दन लगाने की घटना से सम्बद्ध है। पूज्य पाद गोस्वामी जी को श्रीराम के दर्शन श्री हनुमान जी की प्रेरणा से इसी घाट में हुये थे। जिसका उल्लेख हनुमान जी के द्वारा कहे हुए दोहे से स्पष्ट होता है –
चित्रकूट के घाट पर, भइ संतन की भीर।

तुलसीदास चन्दन घिसै, तिलक देत रघुवीर।।

तोतामुखी श्री हनुमान जी द्वारा इस दोहे का निर्देश किये जाने से यहाँ पर एक तोतामुखी हनुमान जी की प्रतिमा आज भी पायी जाती है। 

Amidst the large crowd of holy men in Chitrakoot, while Tulsidas grinds the sandalwood to turn it into paste, Raghubeer (Lord Ram) appeared before him asking the paste to be smeared on his forehead. Finally Tulsidas blessed and got the grace of the Lord.

दूसरी प्रसिद्धि श्री रामचरित मानस के अनुसार श्री राम का यह निर्देश कि- 

रघुवर कहो लखन भल घाट।

करहु कतहु अब ठाहर ठाटु।।

ये भी रामघाट की ओर संकेत कर रहा है। इस घाट के पश्चिम की ओर यज्ञवेदी एवं पर्ण कुटी नामक स्थान आज भी स्थित है जो कि भगवान राम के निवास की स्मृति को आज भी ताजी बना रहे हैं।

 This is the first place to be visited as it is considered holy and sacred with thousands of pilgrims and tourist coming here every year to take a holy dip in the waters of River Mandakini. The evening Aarti is a mesmerizing experience with earthen diyas (lamps) floating in the calm waters and holy chants filling up the air.

Matya-Gajendreshwar Temple :

At Ram Ghat, this temple is also a must visit as this is the place where Lord Brahma offered penance in the Satyug and founded a Shivlinga. Lord Rama visited this place many decades later and did Rudrabhishek here after bathing here in River Payaswini. MatyaGajendreshwar Ji was the protector of chitrakoot, so the Lord Ram had taken the permission to stay here.

मत्यगेंद्रनाथ स्वामी का मंदिर मंदाकिनी नदी के तट पर रामघाट में स्थित है। इस मंदिर में विराजमान चार शिवलिंग में एक शिवलिंग भगवान ब्रह्मा और एक भगवान श्री राम ने स्थापित किया था। ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के लिए रामघाट स्थित यज्ञदेवी अखाड़ा में यज्ञ किया था। 108 कुंडीय यज्ञ से मदमस्त हाथी की तरह झूमता हुआ एक शिवलिंग प्रगट हुआ था। जिसकी स्थापना ब्रह्मा ने मत्यगेद्रनाथ के रूप में रामघाट में की थी और उनको चित्रकूट का क्षेत्रपाल नियुक्त किया था। इसीलिए जब भगवान श्री राम यहां पर वनवास काटने आए तो उन्होंने चित्रकूट निवास के लिए स्वामी मत्यगेंद्रनाथ से आज्ञा ली थी। इसके बाद श्रीराम ने खुद उस शिवलिंग के बगल में एक शिवलिंग की स्थापना की थी। 

Generally people take a boat ride that takes you along the other ghats and visit the Raghav-Prayag ghat, where a confluence of the Mandakini, Payaswini, and Gayatra (or Savitri) Rivers happens, but not visible to the eyes! There’s also a separate Janaki Kund (where Sita bathed) and a Lakshman Ghat.

3. भरत मिलाप (Meeting place of Lord Ram and his brother Bharat ) –

माता कैकेयी के द्वारा श्रीराम को वनवास दे दिये जाने पर जब श्री भरत अपने ननिहाल से अयोध्या पहुंचे, तथा उन्हें श्रीराम के वनवास की खबर मिली, तब वह अपने छोटे भाई शत्रुधन सहित, गुरू वशिष्ठ एवं तीनों माताओं, मंत्रियों तथा राज्य के असंख्य नर-नारियों को लेकर भगवान राम को मनाने चित्रकूट आये, और श्री कामद्गिरी के दक्षिण किनारे पर भगवान राम से उनका मिलाप हुआ। उनके मिलाप काल में पर्वत का जड़ पाषाण भी द्रवित हो उठा, जिसके कारण पाषाण शिला में उनके चरण चिन्ह अंकित हो गये हैं। 

बन्धुओं का यह मिलन भारतीय संस्कृति में स्नेह का जीता जागता स्वरूप है और इसी स्थान को भरत मिलाप के नाम से जानते हैं ! पूज्यपाद गोस्वामी जी ने श्री रामचरित मानस में दिखाया है कि सारा विश्व इनके मिलन को अपलक नेत्रों से देखता रह गया था-

बरबस लिए उठाइ उर, लाए कृपानिधान।

भरतरामकी मिलनि लखि, बिसरे सबहि अपान।।

There are evident footprints of Lord Ram and his brothers here that are worshiped (See in below image). It is the meeting place of four brothers during the period of exile of Lord Rama. Bharat Milaap Temple is an important temple of Chitrakoot, located along the circumambulation of Kamadgiri.

4. लक्ष्मण पहाडी (A Little Hill Of Lakshman)-

श्री कामद्गिरी के दक्षिण में लक्ष्मण पहाड़ी नाम की एक छोटी पहाड़ी है, जिसमें श्री लक्ष्मण जी का मन्दिर है। भगवान राम और जानकी के इस शयन स्थल से कुछ दूर, हाथ में धनुषबाण ले करके लक्ष्मण उनकी रक्षा में रात्री जागरण किया करते थे अत: इसी स्थान को लक्ष्मण पहाडी कहते हैं ! जैसे कि मानस में उल्लेख भी है कि-

कछुकि दूरि धरि वान सरासन।

जागन लगे बेठि बीरासन।।

यहाँ पर एक कूप है, जो धरातल के स्तर से काफी ऊँचाई में स्थित है, किन्तु इसमें हमेशा जल मौजूद रहता हैं। मन्दिर से सम्बन्धित एक दलान है, जिसमें कुछ स्तम्भ हैं, जिन्हें लोग सप्रेम भेंट करते हैं और श्री लक्ष्मण जी से भेंट का आनन्द प्राप्त करते हैं।

Lord Ram spent most of his free time here. His brother Lakshman used to guard the Kamadgiri Mountain when Lord Ram and Sita used to rest. There is a temple after Lakshman and a pillar. Pilgrims embrace this pillar as if they were embracing Lakshmana himself .

5. कोटि तीर्थ (A Divine Shrine of the great Sages)-

यह स्थान रामघाट से पूर्व 6 मील दूर सड़क पर्वत पर स्थित है। यहाँ पर एक कोटि मुनीश्वर श्रीराम जी के दर्शनार्थ तप करते थे, उनके ऊपर प्रसन्न होकर श्रीराम जी ने सबको एक साथ दर्शन दिये। यहाँ पर एक शिवजी का मन्दिर है। इस स्थल को सिद्धाश्रम कहते हैं। 

शिव पुराण और अन्य कथाओं के आधार पर हनुमान त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हो रहा था, तो समस्त तीर्थ नदियों का जल लेने गये और जिस कलश में जल भर के लाये थे, उससे कुछ जल कुंड में भी डाला था। तभी से यह कुंड कोटितीर्थ के नाम से जाना जाता है और अग्नि, वरूण, सूर्य, चन्द्र, वायु आदि अनेक तीर्थी के होने से इसे कोटि तीर्थ कहते हैं।

कोटि तीर्थ से लगभग 1.5 Km दक्षिण की ओर पर्वतीय मार्ग पर एक स्थान है जो देवांगना के नाम से प्रचलित है ! यहाँ देवकन्या ने अपार तप किया था। भगवान राम जी उसे दर्शन दिये थे, इसके सम्बन्ध में कई तरह की जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं। यह देवकन्या जयन्त की पत्नी थी और इसी देवकन्या की स्मृति में निर्मित यह स्थान आज भी अपना आलोक बिखेर रहा है। यहाँ लाखो नर-नारी दर्शन के लिए आते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

6. जानकी कुंड (Godess Janki’s Pool)-

रामघाट से 2 किलोमीटर दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनारे जानकी कुण्ड स्थित है। जनक पुत्री होने के कारण सीता को जानकी कहा जाता था। माता जानकी यहां स्नान करती थीं। यहाँ पर आज भी पाषाण शिला में श्री जानकी जी के चरण-चिन्ह अंकित हैं। जो उनकी स्मृति को इतने समय बीतने पर भी ताजी बनाये हुये हैं। यहाँ बहुत से ऋषिगण फलाहार करके श्रीराम जी की आराधना करते हैं।

Janaki Kund is a serene calm place located near a Mandakini river bank and it is here that Maa Sita bathed and spend some quite time. Now sages use this place for their meditation.

जानकी कुण्ड के समीप ही रघुवीर मंदिर और संकट मोचन मंदिर भी है। रघुवीर मंदिर का निर्माण महान तपस्वी परमार्थ भूषण संत शिरोमणि श्री रणछोड़दास जी महाराज से विशेष आग्रह करके, उनके प्रियशिष्य श्री भीम जी भाई मानसाटा कलकत्ता वालों ने विक्रम संवत् 2009 में कराया था ! यहाँ पर भगवान श्री राम और जानकी जी की मूर्ति विराजमान हैं। इन संत का एक दोहा प्रचलित है – 

पानी पीने से, घटै न सरिता नीर। धर्म किये धन न घटै, सहाय करै रघुवीर।।


7. स्फटिक शिला (Sphatik Rock)-

यह जानकी कुण्ड से 1 कि0 मी0 दक्षिण मन्दाकिनी किनारे पर स्थित है। श्रीराम चरित मानस के अनुसार श्रीराम जी ने इसी शिला पर माँ जानकी का श्रृंगार किया था-

एक बार चुनि कुसुम सुहाए। निसकर भूषन राम बनाए।।

सीतहि पहिराए प्रभु सादर। बैठे स्फटिक शिला पर सुन्दर।।

श्रीराम जी तथा लखन सहित माँ जानकी के दर्शन कर वही उपर्युक्त देवकन्या स्वर्ग लोक गई। स्वर्ग लोक जाकर अपने पति जयन्त से श्रीराम सीता जी के दर्शन के लिए कहा, तो जयन्त ने कहा कि स्वर्ग लोक का वासी मृत्यु लोक में दर्शन नहीं करेगा। फिर भी जब देवकन्या नहीं मानी, तब जयन्त आकर कौवे का रूप धारण किया तथा सीता जी के चरण में चोच मार के भागा, पर उसे कहीं थाह नहीं मिली. उसी क्षण जयन्त की दुष्टता पर श्रीराम ने ब्रह्य कण का प्रयोग किया था किंतु अन्त में जयन्त ने अपनी दुष्टता पर क्षमा माँगी। ये सबसे भयानक अपराध है इसे शास्त्रों मे  ‘नामापराध’ कहा गया है | इसका प्रायश्चित तभी हो सकता है जब (जिसके प्रति अपराध हुआ हो) उसकी शरण में जाये और वो ही क्षमा करे !

This place is visited for a huge boulder (reddish white in color) called ‘Spattik Shilla’ and is located on the banks of River Mandakini. According to legend it is here the Lord Ram and Sita usually sat to talk and spend some quite moments together. Their footprints are marked and hence people offer thier blessings here. 


8. श्री वाल्मीकि आश्रम (Residence Of Sage ‘Valmiki’) –

यह स्थान चित्रकूट से कर्वी-इलाहाबाद मार्ग पर 32 कि0मी0 पूर्व स्थित है। यहाँ श्री वाल्मीकि जी का आश्रम है। श्री वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना यहीं पर की थी, जो कि संस्कृत भाषा का आदि काव्य माना जाता है। वनवास के समय भगवान श्रीराम यहाँ आकर श्री वाल्मीकि जी से अपने निवास के लिए स्थान पूॅछा, तो श्री महर्षि जी ने चित्रकूट में रहने के लिए निर्देश किया था. जैसे श्री तुलसीदास जी मानस में कहा है-

चित्रकूट गिरी करहु निवासू। जहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।।

The Valmiki Ashram is situated on a lofty hill on the bank of the Valmiki River, about 18 Km from the district headquarters of Chitrakoot on the Allahabad road. It is believed that Lord Ram, Lakshman and Sita had passed through this Ashram on their way to Chitrakoot. This is also believed to be the birth place of Luv and Kush, two sons of Sita and Lord Ram.

यहाँ पर एक छोटी सी पहाड़ी है, जिसमें देवी जी की मूर्ति है। यहाँ भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत विद्यालय भी है।

9. राम दर्शन मंदिर (A Museum Of the Lord Ram) –


It is one of the best place to visit in Janaki-kund, Chitrakoot. The museum is surrounded by a lush garden and a large idol of Lord Hanuman which just fascinated us. The museum contains the sculptural depiction of Ramayana and the life of Lord Rama. There were ducks all around the museum that further exemplified the beauty of the place. 

Ram Darshan is a modern temple with a difference – once visited, its memories can never be erased from man’s inner eye.’

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Here we come to an end of this post because it is being too larger. There are many places still to describe. Rest of the things are explained in our next part of Chitrakoot Dham 2.

Complete Travelling of Chitrakoot Dham on Youtube : 

https://m.youtube.com/watch?v=85xalyI4SbA

Thank you ! Jai Siya Ram !! Jai Kamata Nath !!

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