Why does February have 28 days, and July and August, 31 days?

दोस्तों हर साल आपको, एक ही साल में, कई
बार कुछ सन्देश मिलते होंगे  कि ये नया साल मनाओ वो नया साल मनाओ… लेकिन
ज्यादा कुछ पता नहीं चलता होगा की कौन कब क्यूँ कोई अलग ही नया साल
मना रहा होता है…

आखिर है क्या नया साल ?
नया साल किस दिन आता है?
आखिर नया साल कब से मनाया जा रहा है ?
क्या नया साल शुरू से 1 January से ही मनाया जाता रहा है ?
नया साल कैसे बना 1 जनवरी ?
नया साल रात को १२ बजे क्यूँ शुरू माना जाता है ?

जब हम इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने चलते हैं तो हमको कुछ और सवालों के जवाब भी मिलते हैं जो आज के ज़माने में बहुत ही कम लोग जानते हैं,
जैसे –
एक साल में 365 दिन ही क्यूँ ?
एक साल में 12 महीने ही क्यूँ ?
एक महीने में 30 – 31 दिन ही क्यूँ ?
एक हफ्ते में सात दिन ही क्यूँ ?
जुलाई और अगस्त लगातार 31 दिन के ही क्यूँ ?

# ऐसे कई रोचक सवाल हैं !

आइये जानते हैं इनकी शुरुवात और वजह :

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— आपने शायद ये तो सुना ही होगा की हिन्दू सनातन धर्म को सारा विश्व सबसे
पुराना मानता है…
इसी हिन्दू सनातन धर्म से निकला सबसे पहला (कुछ देर के लिए मान लीजिये, साबित
थोड़ी देर में हो जायेगा) कैलेंडर !

जो की पूर्णतः गृह नक्षत्रों के आधार और उनकी स्तिथि व दिशा के आधार पर
बनाया गया था.

उदाहरण के लिए :

दिवाली हर साल अमावस की रात को होती है लेकिन दिवाली की कोई निश्चित तारीख अंग्रेजी कैलेंडर में फिक्स नहीं होती यानी दूसरे शब्दों में अगर दिवाली ३ नवम्बर २०१४ को अमावस थी तो ३ नवम्बर २०१५ को अमावस नही होगी.

ऐसा इसलिए की हिन्दू कैलेन्डर पूर्णतः गृह और नक्षत्रों के आधार पर बनाया गया, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर की शुरुआत
भारतीय हिन्दू कैलेंन्डर की नकल से बनाया गया (कुछ देर में ये बात साबित हो जाएगी).

1 साल में 365 दिन क्यूँ होते हैं?

—> 365 दिन में पृथ्वी सूर्य की सम्पूर्ण परिक्रमा करती है.(365.25 दिन जो चार साल में 25*4 होने से 366 बन जाता है)

—>1 साल में १२ मास (महीने) क्यूँ ?

हिन्दू कैलेन्डर नक्षत्रों पर आधारित है, चंद्रमा हर महीने पूर्ण रूप से खत्म (अमावस) व  पूर्ण स्वरुप (पूर्णिमा) में दिखाई देता है. इस नए चंद्रमा के बनने की शुरुआत से लेकर अगली नयी शुरुआत तक के समय को चन्द्रमा का एक चक्र कहते हैं.

हिन्दू  कैलेन्डर में हर मास की तारीख इस तरह से होती हैं:

शुकल पक्ष की एकम, द्वितीय,तृतीया, चतुर्थी
,पंचमी, षष्ठी, सप्तमी,
अष्टमी, नवमी, दशमी,
एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी,
चतुर्दशी, पूर्णिमा (15 वां दिन)…

लेकिन अब चन्द्र घटना शुरू
होगी अर्थात काला होने लगेगा तो कृष्ण पक्ष
की एकम ,द्वितीय, तृतीया,चतुर्थी,पंचमी,
षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी,
एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी,
चतुर्दशी, अमावस्या (30 वां दिन)…

• इसी प्रकार 1 मास को ३० दिन में बांटा गया. लेकिन उस समय के विज्ञान के अनुसार (करोड़ो लाखों वर्षों पूर्व) यह चक्र ३० व ३१ दिन का माना जाता था.
तो उसी के अनुसार पहले महीने में ३१ दिन, दूसरे में ३०, तीसरे में ३१ इस तरह से कैलेन्डर बनाया गया.

नतीजा क्या हुआ :

३१+३०+३१+३०+३१+३०+३१+३०+३१+३०+३१ ऐसे ग्यारह महीने तो बन गए लेकिन क्यूंकि साल में 365 दिन ही होने थे तो बाकी बचे दिन सिर्फ २९ जो की आखिरी
महीने में रखे गए जैसा की स्वाभाविक भी है की Balancing figure आखिरी में डाला जाता है. (365-336 दिन = 29 दिन)

अब ये सोचने वाली बात है की आखिरी महीना तो दिसम्बर होता है…(आज के अंग्रेजी  कैलेन्डर के अनुसार ) लेकिन दिसम्बर
तो पूरे ३१ दिन का होता है.

तो इसको समझिये…

—> हुआ यूँ की पुराना हिन्दू कैलेन्डर जो शुरू होता था आज के 1 मार्च से. (मुझे मालूम है आप कहेंगे 1 अप्रैल लेकिन ऐसा बाद मे हुआ, पहले 1 मार्च से था उसके बाद 1 अप्रैल से हुआ) 1 मार्च अंग्रेजी कैलेन्डर का तीसरा महीना होता है… जबकि कुछ समय पहले तक हिन्दुओ का पहला महीना होता था…
यानी पहला महीना अगर March है
तो आखिरी महीना February हुआ. जो आज के कैलेन्डर से सिर्फ थोडा सा अलग है
जिसका एक और कारण है:

पहले देखिये March ३१ का पहला महीना…
अप्रैल ३० ; मई ३१; जून ३०; जुलाई ३१; अगस्त ३० का होता था…

• लेकिन आज ३१ है क्यूंकि एक राजा ऑगस्टस के नाम पर ये महीना रखा था (हिन्दुओ ने नही, बाद के अंग्रेजो ने क्यूंकि हम आज के कैलेंडर के अनुसार
नाम पढ़ रहे हैं).

—> नीचे दिया गया है की August 6th month था जो ३१ का सिर्फ इसलिए
किया गया क्यूंकि राजा को लगता था उसके
नाम के महीने में 1 दिन कम क्यूँ हो? ऐसा करने के लिए अगले सभी महीनों को छेड़ा गया, सितम्बर जो ३१ का होना चाहिए
था वो सिर्फ ३० का कर दिया गया, अक्टूबर को ३० की जगह ३१, नवम्बर को ३०, दिसम्बर को ३१, जनवरी को ३१
का ही रखा गया और 1 दिन February से कम कर दिया गया २९ की जगह २८ यानी  फिर से Balancing figure.

—>January को भी ३१ बाद में सिर्फ इसलिए किया गया की ये पहला महीना घोषित किया गया था (बाद में जो की आज का मौजूद कैलेन्डर है)…

>—–))) In english calenders, this reason is explained as follows which is completely differ from Hindu aspects:

” According to a popular legend, July was named after Julius Caesar and hence it had 31 days. Later, when Augustus Caesar took over the
Roman Empire, he wanted August, the month named after him, to have 31 days as well. Hence, the two extra days were taken from February, which was then left with 28 days. ”

Thank You !!!!

Posted by: R. Soni, S. M. and IA-Team

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